Supreme Court quashed FIRs against Gen Z NEET-UG protesters.
सुप्रीम कोर्ट से बड़ी खबर Big news from the Supreme Court
नई दिल्ली, 1 सिंतंबर 2026. NEET-UG 2026 का पेपर लीक होने के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी के प्रतिवादस्वरूप पैदा हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से जुड़े देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में शामिल Gen Z प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को रद्द करने के लिए, केंद्र सरकार के आग्रह पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (1 सितंबर, 2026) को एक दुर्लभ और असाधारण कदम उठाया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए “पूरा न्याय” सुनिश्चित किया और कहा कि “इन FIRs की जांच नहीं की जाएगी और इन्हें हर तरह से बंद कर दिया जाएगा”।
कैसे आया यह निर्णय?
सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला दिल्ली पुलिस के रुख में आए बदलाव के बाद आया, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आती है।
दरअसल राजधानी में होने वाले हाई-प्रोफाइल ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से कुछ दिन पहले, 5 सितंबर को CJP के मार्च के खतरे को देखते हुए, दिल्ली पुलिस ने 31 अगस्त को कोर्ट को बताया कि वह इन FIRs पर आगे नहीं बढ़ना चाहती।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका आदेश केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक लागू था, जहाँ विरोध प्रदर्शन हुए थे।
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र होगी कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच CJP के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के संबंध में कोई नई FIR दर्ज न करें।
हालांकि, बेंच ने दिल्ली पुलिस को उन 2,873 लोगों के खिलाफ “नई और विशिष्ट” FIR दर्ज करने की अनुमति दी, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और जिनकी पहचान सेंट्रल दिल्ली में जंतर-मंतर विरोध स्थल पर फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (Facial Recognition Technology) के जरिए की गई थी। कोर्ट ने कहा कि FIRs से उनके अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए और उन्हें अपना बचाव करने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह NEET-UG 2026 पेपर लीक के बाद खुद की जान लेने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए पूरे देश के लिए एक नीति बनाए और तीन महीने के भीतर भुगतान करे।
एक घंटे तक चली सुनवाई का समापन दोस्ताना माहौल में हुआ, जिसमें चीफ जस्टिस कांत ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा, “हम सभी ने छात्र जीवन देखा है।” इसी कोर्ट रूम में CJI की ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ (parasites) वाली मौखिक टिप्पणियों से ही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का जन्म हुआ था।
आदेश सुनाने के बाद, CJI ने सलाह दी कि छात्रों को “प्रतिस्पर्धी दुनिया में अपनी जगह बनाने और करियर पर ध्यान देना चाहिए”।
कोर्ट ने कहा कि उसने मुख्य रूप से “युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य” को ध्यान में रखते हुए अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करने का फैसला किया।
कोर्ट रूम में मौजूद संतुष्टि के माहौल को ज़ाहिर करते हुए चीफ जस्टिस कांत ने कहा, “एक संस्था के तौर पर, हम शुक्रगुज़ार हैं कि एक सकारात्मक माहौल बना है जो युवाओं की मदद करेगा। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।”
ये FIRs शुरू में 20 जुलाई को पुलिस की सख़्त कार्रवाई के बाद दर्ज की गई थीं, जिसमें भाग रहे छात्रों पर आँसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था। FIRs में पुलिस ने युवा प्रदर्शनकारियों पर दंगा करने, हत्या की कोशिश और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसे कई आरोप लगाए थे।


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